हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान -लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा

हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान -लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा

हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान -लोकसभा, राज्यसभा  और विधानसभा 

हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान -लोकसभा, राज्यसभा  और विधानसभा



(1) लोकसभा -हिमाचल प्रदेश में लोकसभा के 4 निर्वाचन क्षेत्र हैं - मण्डी, काँगड़ा, हमीरपुर और शिमला | शिमला सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है | मण्डी लोकसभा क्षेत्र का क्षेत्रफल हिमाचल प्रदेश में सर्वाधिक है | यह हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रफल का 60% (33350 वर्ग किमी.) है |

इतिहास - 1952 ई. के पहले लोकसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश से 3 सदस्य लोकसभा में चुनकर भेजे गए | 1952 ई. में 3 निर्वाचन क्षेत्र थे | महासू, मण्डी और चम्बा - सिरमौर | हिमाचल प्रदेश से प्रथम लोकसभा सदस्य राजकुमारी अमृत कौर मण्डी से चुनी गई जो देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनी |राजा आनंद चंद हिमाचल प्रदेश से लोकसभा के लिए चुने जाने वाले प्रथम निर्दलीय सांसद थे | 1957 ई. में हिमाचल प्रदेश से लोकसभा के लिए 4, 1962 ई. में 4, 1967 में 6, 1972 में पुन: 4 सीटों के लिए चुनाव हुए | प्रत्येक लोकसभा चुनाव क्षेत्र के अंदर 17 विधानसभाएँ (17 * 4 = 68) आती हैं | कृष्णदत्त सुल्तानपुरी ने शिमला लोकसभा क्षेत्र से लगातार 6 बारजीत (1980, 1984, 1989, 1991, 1996, 1998) दर्ज की है |
  • शिमला लोकसभा क्षेत्र - सिरमौर - 5, सोलन - 5, शिमला - 7 ------> कुल = 17 विधानसभा |
  • काँगड़ा लोकसभा क्षेत्र - चम्बा - 4, काँगड़ा - 13 --------> कुल = 17 विधानसभा क्षेत्र |
  •  हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र - मण्डी - 1 (धर्मपुर), हमीरपुर - 5, ऊना - 5, बिलासपुर - 4, काँगड़ा - 2 -------->कुल = 17 विधानसभा क्षेत्र |
  •  मण्डी लोकसभा क्षेत्र - मण्डी - 9, किन्नौर - 1, लाहौल-स्पीति - 1, चम्बा - 1 (पांगी-भरमौर), शिमला - 1 (रामपुर), कुल्लू - 4 --------> कुल = 17 विधानसभा क्षेत्र |
(2) राज्यसभा - वर्तमान समय में हिंचल प्रदेश में राज्यसभा के लिए 3 स्थान हैं | हिमाचल प्रदेश को राज्य सभा में प्रथम बार 1952 में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान किया गया | चिरंजीलाल वर्मा 1952 में हिमाचल प्रदेश का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले प्रथम व्यक्ति थे | वे 1952 से 1958 तक कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा में हिमाचल के सांसद रहे | आनंद चंद राज्य सभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रथम निर्दलीय थे | वे 1958 से 1964 तक राज्यसभा के सदस्य रहे | लीला देवी हिमाचल प्रदेश की प्रथम महिला राज्यसभा सदस्या थी | वे 1956-1962 तक राज्यसभा की सदस्य रही | रोशनलाल ने लगातार तीन बार 1970 से 1976, 1976 से 1982, 1982 से 1988 तक राज्य सभा में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया | हिमाचल में किसी भी राज्यसभा सदस्य के लिए यह सर्वाधिक अवधि है | वे 18 वर्ष तक राज्यसभा के सदस्य रहे |


हिमाचल प्रदेश के वर्तमान सदस्य -
1. विमला कश्यप (बीजेपी) - 2010-2016
2. जे. पी. नड्डा (बीजेपी) - 2012-2018
3. विप्लव ठाकुर (बीजेपी) - 2014-2020
आनंद चंद हिमाचल के प्रथम सांसद हैं, जिन्होंने संसद के दोनों सदनों में हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया | वे राज्यसभा और लोकसभा में निर्दलीय सदस्य रहे | चन्द्रेश कुमारी हिमाचल प्रदेश की प्रथम महिला है, जो प्रदेश का नेतृत्व लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में कर चुकी हैं |

(3) विधानसभा - वर्तमान समय में हिमाचल प्रदेश में 68 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं | काँगड़ा जिले में प्रदेश विधानसभा के सर्वाधिक 15 निर्वाचन क्षेत्र हैं | किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में विधानसभा के मात्र एक-एक क्षेत्र हैं | क्षेत्रफल की दृष्टि से शिमला सुरक्षित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र प्रदेश का सबसे छोटा निर्वाचन क्षेत्र है | क्षेत्रफल की दृष्टि से लाहौल स्पीति सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र प्रदेश का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र है | इसका क्षेत्रफल 13835 वर्ग किमी. है | लाहौल स्पीति विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मतदाताओं की दृष्टि से हिमाचल प्रदेश का सबसे छोटा विधानसभा क्षेत्र है | किन्नौर जिले का 'का' मतदान केंद्र हिमाचल प्रदेश का सबसे छोटा मतदान केंद्र है | यहाँ केवल 16 पंजीकृत मतदाता हैं | लाहौल-स्पीति का 'हिक्किम' एशिया का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र है, इसकी ऊंचाई 15000 फुट है | काँगड़ा जिले में 15, मण्डी जिले में 10, शिमला जिले में 8, ऊना जिले में 5, सोलन जिले में 5, सिरमौर जिले में 5, हमीरपुर जिले में 5,चम्बा जिले में 5, बिलासपुर जिलेमें 4, कुल्लू जिले में 4, किन्नौर जिले में 1 और लाहौल-स्पीति जिले में 1 में विधानसभा क्षेत्र हैं |
(4) विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव -
(क) विधानसभा अध्यक्ष - जयवंत राम हिमाचल प्रदेश विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष थे | वे 1952 से 1956 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे | ठाकुर सेन नेगीहिमाचल प्रदेश विधानसभा में सबसे अधिक अवधि तक अध्यक्ष रहे | वे 1979 से 1982, 1982 से 1984 और 1990 से 1993 तक 3 बार अध्यक्ष बने | श्रवण कुमार 1977 से 1979 तक केवल 2 वर्षों तक अध्यक्ष रहे | विद्या स्टोक्स प्रदेश विधानसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष बनी | वे 1985 से 1990 तक इस पद पर कार्यरत रही |
(ख) विधानसभा उपाध्यक्ष - हिमाचल प्रदेश विधानसभा के प्रथम उपाध्यक्ष कृष्णचंद्र थे | वे इस पद पर 1952 से 1956 तक रहे |
(ग) विधानसभा सचिव (सेक्रेटरी) - एन. सी. नंदी प्रदेश विधानसभा के प्रथम सचिव थे | वे इस पद पर सबसे कम अवधि तक रहे | उन्होंने इस पद पर केवल 15 दिन कार्य किया | ठियोग के लक्ष्मण सिंह कश्यप जुलाई, 1987 से फरवरी 1995 तक करीब 8 वर्ष तक की सर्वाधिक लम्बी अवधि तक इस पद पर रहे |
(घ) मुख्य सचिव - के. एल. मेहता हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पहले मुख्य सचिव थे |



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