अब एचपीयू में भी होगी शोध पीठ



अब एचपीयू में भी होगी शोध पीठ


यूजीसी के आदेश पर विश्वविद्यालय ने रिसर्च का लेवल बढ़ाने के लिए की तैयारी

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भी रिसर्च का लेवल बढ़ाने की तैयारी हो गई है। एचपीयू प्रशासन ने यूजीसी के निर्देशों के बाद दस सदस्यों की पीठ का गठन करने का फैसला ले लिया है। अब विवि में सभी अहम विषयों से संबंधित शिक्षाविदों को शामिल कर पीठ स्थापित की जाएंगी, ताकि विश्वविद्यालय में रिसर्च का लेवल बढ़ सकें और शोधकर्ताओं को भी शोध के बेहतर तरीके मिल सकेंगे। बता दें कि अब यूजीसी से संबंधित विश्वविद्यालयों को दस सदस्यों की पीठ स्थापित करनी होगी। यानी कि हर विवि में दस सदस्यों से जुड़े पीठ शिक्षण संस्थान के रिसर्च लेवल को बढ़ाएंगे। वहीं यह पीठ यानी कि चेयर विश्वविद्यालय के लिए जरूरी होगी। इससे यह पता लगाया जाएगा कि विश्वविद्यालय में रिसर्च लेवल कितना है, वहीं विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले शोध छात्रों को रिसर्च करने में स्थापित किए गए पीठों का कितना लाभ मिल रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने इस बाबत विश्वविद्यालय को इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं 21 दिनों के भीतर इस बारे में रिपोर्ट भी तलब की है। यूजीसी ने पीठ स्थापित करने के लिए जो मापदंड तय किए हैं, उसमें सबसे पहले यह तय किया गया है कि दस सदस्यों की इस पीठ में वित्त पोषित प्रख्यात महिला विद्वानों, प्रशासकों, कलाकारों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, समाज सुधारक शामिल होने चाहिएं। अहम यह है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पीठों की स्थापना के लिए प्रस्ताव भी आमंत्रित किए हैं। अगर कोई विश्वविद्यालय केंद्र सरकार व यूजीसी से पीठों का चयन करना चाहते हैं, तो वे प्रस्ताव अलग से भी भेज सकते हैं। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन को संस्थान का नाम, पता, राज्य, विश्वविद्यालय का स्वरूप, वहीं क्या यूजीसी से अनुदान प्राप्त संस्थान है या नहीं,  विश्वविद्यालय द्वारा स्थापना के लिए प्रस्तावित पीठ का नाम, प्रस्तावित क्रियाकलाप व अन्य जरूरी जानकारी भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं। हर विश्वविद्यालय में गणित, कविता और रहस्यवाद, वन वन्य, जीवन, प्रशासन, औषधि एवं स्वास्थ्य, शैक्षिक सुधार, साहित्य, विज्ञान, स्वतंत्रता सेनानी, संगीत एवं अभिनय कला के पीठों के चयन करने होंगे, ताकि इन सभी आवश्यक विषयों पर शोध कार्यो को सही ढंग से अमलीजामा पहनाया जा सकें।

Source:-Divya Himachal



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