रूसा ने रोकी टीजीटी भर्ती

रूसा ने रोकी टीजीटी भर्ती:-






हिमाचल के सरकारी स्कूलों में नए सत्र से टीजीटी शिक्षकों के हजारों पद खाली रह जाएंगे। रूसा के सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन न होने की वजह से राज्य के 3636 टीजीटी शिक्षक भर्ती पर रोक लग गई है। पहले कमीशन के आधार पर टीजीटी शिक्षकों की भर्ती रोकी गई थी, तो वहीं अब सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन को लेकर कोई भी समाधान न निकलने तक बैचवाइज भर्ती पर भी शिक्षा विभाग ने रोक लगाने का फैसला लिया है। ऐसे में सरकार से मंजूरी मिलने के बाद भी 3636 टीजीटी शिक्षकों की भर्ती के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। बता दें कि सरकारी स्कूलों में रेगुलर शिक्षक भर्ती करने के लिए सरकार ने टीजीटी आर्ट्स के 684, टीजीटी नॉन मेडिकल के 359, टीजीटी मेडिकल के 261, शास्त्री के 1049, लैंग्वेज टीचर के 590, जेबीटी के 693 पदों को भरने की अनुमति राज्य सरकार ने पिछले महीने दे दी थी। बावजूद इसके रूसा सिस्टम के सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन न होने की वजह से कमीशन और बैचवाइज भर्ती पर रोक लगा दी गई है। हालांकि इससे पहले शिक्षा विभाग ने ही सरकार से शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए प्रोपोजल भेजा था। अब रूसा सिस्टम के जंजाल में शिक्षा विभाग ऐसा फंस गया है कि शिक्षकों के खाली पदों को ही नहीं भर पा रहा है। हालांकि शिक्षा विभाग ने रूसा के एक्सपर्ट से सब्जेक्ट कॉम्बिनशन टीजीटी भर्ती पर बन रहे रोड़े पर समाधान मांगा है। शिक्षा विभाग के अनुसार, आरएंडपी रूल्स कहते हैं कि टीजीटी मेडिकल बनने के लिए ग्रेजुएशन में बायो व केमेस्ट्री पढ़ना जरूरी है। उसी तरह नॉन मेडिकल में भी साफ है कि अभ्यर्थी को फिजिक्स, केमेस्ट्री व मैथ्स तीनों ही विषय पढ़ना जरूरी है। अब रूसा सिस्टम जब से लागू हुआ है, तो छात्रों को च्वाइस बेस्ड सिस्टम दिया गया है। इस वजह से वर्ष 2015 तक छात्रों ने साइंस, मैथ्स व आर्ट्स के मिक्सअप विषय पढ़ लिए। इसी का खामियाजा है कि चार साल में कालेजों से ग्रेजुएशन करने वाले 20 हजार से ज्यादा छात्र टीजीटी बनने के लिए लिजीबल नहीं हो पाए हैं। बता दें कि जिन छात्रों ने रूसा के तहत ग्रेजुएशन की है, वे शिक्षक बनने के लिए वर्ष 2012 में बनाए गए आर एंड पी रूल्ज को पूरा नहीं करते हैं। शिक्षा विभाग एचपीयू के साथ सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन को लेकर बार-बार अपडेट भी ले रहे हैं। फिलहाल हमीरपुर सिलेक्शन बोर्ड ने टीजीटी भर्ती पर शिक्षा विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है, उसके बाद ही नई भर्तियां निकाली जाएंगी।
 2016 के बाद पढ़ रहे छात्रों को टेंशन नहीं 



उधर, इस मामले में प्रदेश विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक जेएस नेगी ने कहा कि 2015 तक रूसा के तहत पढ़ने वाले छात्र आरएंडपी रूल्स को पूरा नहीं करते है। मगर 2016 में रूसा सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन में बदलाव किया गया था। उसके बाद से मेडिकल, आर्ट्स व नॉन मेडिकल के छात्रों को आरएंडपी रूल्स के तहत सभी आवश्यक सब्जेक्ट पढ़ाए गए हैं।

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