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Himachal Pradesh General Knowledge :- Glacier

हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान-ग्लेशियर
हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान-ग्लेशियर
हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान-ग्लेशियर




हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियर को स्थानीय भाषा में 'शिगड़ी' कहते हैं |


ग्लेशियर को हिमनद के नाम से भी जाना जाता है | ग्लेशियर नदियों को पानी देते हैं व नदियों के उद्गम का प्रमुख स्त्रोत है |


1. बड़ा शिगड़ी - यह हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा ग्लेशियर है, जो लाहौल-स्पीती में स्थित है | इस ग्लेशियर की लंबाई 25 किमी. है और इस ग्लेशियर से चंद्र नदी को पानी मिलता है | इस ग्लेशियर से चंद्रताल झील बनी है |

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2. पार्वती ग्लेशियर - पार्वती ग्लेशियर से पार्वती नदी को पानी मिलता है | यह ग्लेशियर कुल्लू जिले में स्थित है | इस ग्लेशियर की लम्बाई 15 किमी. है |



3. दुधोन ग्लेशियर - दुधोन ग्लेशियर कुल्लू जिले में है |


4. मुल्कीया ग्लेशियर - यह ग्लेशियर लाहौल-स्पीती में स्थित है | इस ग्लेशियर से भागा नदी को पानी मिलता है | इस ग्लेशियर की लंबाई 12 किमी. है |


5. मियार ग्लेशियर - यह ग्लेशियर लाहौल-स्पीती में स्थित है | इस ग्लेशियर से मियार नदी को पानी मिलता है | इस ग्लेशियर की लंबाई 12 किमी. है |


6. व्यासकुण्ड ग्लेशियर - रोहतांग के पास इससे व्यास नदी को पानी मिलता है |

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7. कुल्टी ग्लेशियर - कोकसर के समीप स्थित है |


8. भादल ग्लेशियर - बड़ा भगाल (काँगड़ा) के पास स्थित है , इससे भादल नदी को पानी मिलता है |


9. गेफांग ग्लेशियर - 'लाहौल का मणिमहेश' के नाम से यह ग्लेशियर प्रसिद्ध है |


10. द लेडी ऑफ़ केलांग ग्लेशियर - लाहौल-स्पीती में स्थित है 






Himachal Pradesh General Knowledge :- Una Distt Complete

Himachal Pradesh General Knowledge-Una Complete Distt

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1. जिले के रूप में गठन - 1972 ई.
2. जिला मुख्यालय - ऊना
3. जनसंख्या घनत्व - 338 (2011 में)
4. साक्षरता - 87.23% (2011 में)
5. कुल क्षेत्रफल - 1540 वर्ग किमी. (2.77%)
6. जनसंख्या - 5,21,057 (2011 में ) (7.60%)
7. लिंग अनुपात - 977 (2011 में)
8. दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर - 16.24% (2011 में)
9. कुल गाँव - 814 (आबाद गाँव - 758)
10. ग्राम पंचायतें - 235
11. विकास खण्ड - 5
12. विधानसभा क्षेत्र - 5
13. शिशु लिंगानुपात - 870 (2011 में)
14. ग्रामीण जनसंख्या - 4,76,140 (91.38%)


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(i) भूगोल -


1. भौगोलिक स्थिति - ऊना हिमाचल प्रदेश के पश्चिम भाग में स्थित है | इसके उत्तर में काँगड़ा, पश्चिम में पंजाब राज्य, पूर्व में हमीरपुर और दक्षिण में बिलासपुर जिलें की सीमाएं लगती हैं |

2. पर्वत श्रृंखलाए - ऊना जिला हिमालय पर्वत श्रेणी की शिवालिक पर्वतमालाओं के अंचल में बसा है | ऊना को पश्चिम में जस्वां दून की पहाड़ियाँ पंजाब से पृथक करती हैं | ऊना शहर दून के मध्य में स्थित है | ऊना जिले के पूर्व में जस्वांधार या चिंतपूर्णी धार है जिसे हमीरपुर जिले में सोलह सिंगी धार के नाम से जाना जाता है | भरवैन इसकी सबसे ऊंची चोटी है |

3. नदियाँ - ब्यास और सतलुज के बीच बसे ऊना की प्रमुख नदी स्वान है | यह जस्वां घाटी में बहती हुई आनंदपुर साहिब के पास सतलुज नदी में मिलती है |

(ii) इतिहास - 


ऊना जिला मुख्यत: जस्वां रियासत और कुटलेहर रियासत के अंतर्गत आता है | पूर्व में ये दोनों रियासतें काँगड़ा रियासत का हिस्सा थीं |'

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1. जस्वां रियासत - ऊना जिले का अधिकतर भाग जस्वां रियासत के अंतर्गत आता था जो कि काँगड़ा रियासत के प्रशाका थी | जस्वां रियासत की स्थापना काँगड़ा के कटोच वंश के राजा पूर्व चंद ने 1170 ई. में की थी | इसकी राजधानी अम्ब के पास राजपुर में स्थित थी | जस्वां रियासत काँगड़ा से टूटकर बनने वाली पहली रियासत थी | इस रियासत के उत्तर में सिब्बा और दत्तारपुर तथा पूर्व में काँगड़ा, कुटलेहर और कहलूर राज्य स्थित थे | इस रियासत पर पूर्वचंद से लेकर उम्मेद सिंह तक 27 राजाओं ने शासन किया | मुगल काल में अकबर के समय जस्वां रियासत मुगलों के अधीन आ गई | उस समय जस्वां का राजा गोविंद चंद था | गोविंद चंद के पोते अनिरुद्ध चंद ने दो बार मुगलों के विरुद्ध विद्रोह किया |
संसारचंद के आक्रमण के समय जस्वां संसारचंद के कब्जे में आ गया | संसारचंद के विरुद्ध उम्मेद चंद ने गोरखों का साथ दिया था | जस्वां रियासत पर 1815 ई. में सिखों ने कब्जा कर लिया | वर्ष 1848 ई. में दूसरे सिख युद्ध में उम्मेद सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध सिखों का साथ दिया | उम्मेद सिंह और उसके पुत्र जय सिंह को गिरफ्तार कर अल्मोड़ा भेज दिया गया जहाँ उनकी मृत्यु हुई | 1879 ई. में उम्मेद सिंह के पोते रणसिंह ने अपने पुरखों की रियासत के 21 गाँवों में कब्जा कर लिया था |

2. कुटलेहर रियासत - कुटलेहर रियासत भी ऊना जिले का हिस्सा थी जो काँगड़ा रियासत से टूटकर बनी थी | कुटलेहर रियासत को पूर्व में चौकी कुटलेहर के नाम से जाना जाता था | कुटलेहर काँगड़ा क्षेत्र की सबसे छोटी रियासत थी | इस रियासत पर 40 राजाओं ने शासन किया | कुटलेहर रियासत की स्थापना जसपाल नामक ब्राह्मण ने की | उसने अपनी राजाधानी कोट-कहलूर में स्थापित की | जसपाल के पुत्र और पोते ने भज्जी और कोटी रियासतों की स्थापना की थी | कुटलेहर उत्तरी प्रांत चौकी पर 1758 ई. में घमण्डचंद ने कब्जा कर लिया था | संसारचंद ने 1786 ई. में कुटलेहर पर कब्जा किया जिसे बाद में गोरखाओं ने आजाद करवाया | वर्ष 1809 ई. में राज्य सिखों के अधीन आ गया | कुटलेहर के राजा नारायण पाल ने 1825 ई. में रणजीत सिंह से कौटवालवाह किले के लिए युद्ध किया | कुटलेहर रियासत का अंतिम राजा वृजमोहन पाल था | बेदी विक्रम सिंह ने 1848 ई. में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया | बेदी सुजान सिंह ने ऊना शहर को 1848 ई. में पुन: बेदी शासन के अधीन लाया |

3. स्वतंत्रता संग्राम - ऊना जिले में 19 मई, 1857 ई. को विद्रोह भड़का | ऊना जिले से सर्वप्रथम 1905 ई. में बाबा लक्ष्मण दास आर्य ने स्वाधीनता आंदोलन में प्रवेश किया | उन्हें 1908 ई. में गिरफ्तार कर लाहौर जेल भेजा गया | बाबा लक्ष्मण दास के पुत्र सत्य प्रकाश बागी, महाशय तीर्थ राम ओयल, गोपीचंद भार्गव ऊना जिले के स्वतंत्रता सेनानी थे |

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4. जिले की स्थापना - वर्तमान ऊना जिला 1966 ई. से पूर्व पंजाब के होशियारपुर जिले की तहसील थी | वर्ष 1966 ई. से 1972 ई. तक ऊना काँगड़ा जिले का भाग था | वर्ष 1972 ई. में ऊना को जिलें का दर्जा प्रदान किया गया | ऊना शहर की नींव बाबा कलाधारी ने की थी |

(iii) मेलें - ऊना जिले में चिंतपूर्णी मेला, बसौली में पीर निगाह मेला, मैड़ी में बाबा बड़भाग सिंह मेला प्रसिद्ध है |

(iv) अर्थव्यवस्था - ऊना जिले के पेखूबेला में बीज संवर्द्धन फार्म है | ऊना जिला कागजी नींबू, किन्नू, माल्टा, संतरे और आम के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है | सरकार ने 'अन्जोली' में एक पोल्ट्री फार्म खोला है | ऊना जिले के 3 स्थानों (जलेरा, बंगाणा और पुबोवाल) में दुग्ध अभिशीतन केंद्र हैं | मेहतपुर ऊना जिले का औद्योगिक केंद्र है | ऊना-नंगल रेल लाइन 1991 ई. में बनाई गई | यह ब्रॉड गेज रेल लाइन है |

(v) जननांकीय आँकड़े - ऊना जिले की जनसंख्या 1901 ई. में 1,65,000 से बढ़कर 1951 ई. में 1,96,829 हो गई | वर्ष 1971 ई. में ऊना जिले की जनसंख्या 2,61,357 से बढ़कर 2011 में 5,21,057 हो गई | ऊना जिले का लिंगानुपात 2011 में 977 था | ऊना जिले का जनघनत्व 2011 में 338 हो गया | ऊना जिले में 235 ग्राम पंचायतें, 758 आबाद गाँव, 5 विकास खण्ड और विधानसभा क्षेत्र है | ऊना जिले की 2011 में 91.38% जनसंख्या ग्रामीण और 8.62% जनसंख्या शहरी थी | दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 16.42% रही जोकि 12 जिलों में सर्वाधिक है |

(vi) ऊना जिले का स्थान - ऊना जिला क्षेत्रफल में 10वें स्थान पर है | ऊना जिला जनसंख्या में छठे स्थान पर है | ऊना जिला जनघनत्व (338) में हमीरपुर के बाद दूसरे स्थान पर है | दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर (16.24%) में ऊना जिला प्रथम स्थान पर है | ऊना जिले में सबसे अधिक सिख जनसंख्या पाई जाती है | ऊना जिला सड़कों की लम्बाई (2012 तक) में 1771 किमी. के साथ आठवें स्थान पर था | ऊना जिला (2011 में ) लिंगानुपात में छठे स्थान पर है जबकि शिशु लिंगानुपात में, (2011 में) ऊना (870) 12वें और अंतिम स्थान पर है अर्थात ऊना जिले का शिशु लिंगानुपात न्यूनतम (2011 में) है | ऊना जिला 87.23% साक्षरता के साथ दूसरे स्थान पर है | ऊना जिला वन क्षेत्रफल (487 वर्ग किमी.) में दसवें और वनाच्छादित क्षेत्रफल (205 वर्ग किमी.) में आठवें स्थान पर है | ऊना जिले में काँगड़ा के बाद सर्वाधिक भैंसे हैं | ऊना जिला उद्योग में रोजगार उपलब्धता के मामले में चौथे स्थान पर हैं | ऊना जिला काँगड़ा के बाद सबसे ज्यादा आम उत्पादन करने वाला जिला है | ऊना जिला (2011-2012 में ) संतरा, माल्टा, अमरुद, पपीता और आंवला उत्पादन में दूसरे स्थान पर है | सबसे कम कच्ची सड़कों की लम्बाई (170 किमी.) ऊना जिलें में हैं

हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान -पूर्ण राज्य का दर्जा

 हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान -पूर्ण राज्य का दर्जा 



हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान -पूर्ण राज्य का दर्जा
हिमाचल प्रदेश सामान्य ज्ञान -पूर्ण राज्य का दर्जा


 





15 अगस्त, 1947 को देश को स्वतंत्रता मिलने पर भी यहाँ के शासक आसानी से जनता के हाथों में सत्ता सौंपने में संकोच कर रहे थे | लेकिन ठियोग के राजा ने 17 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र ठियोग की लोकतांत्रिक सरकार का गठन किया और राज्य की बागडोर जनता को सौंप दी | सूरतराम प्रकाश को मुखिया बनाया गया | ठियोग भारतीय संघ में विलय होने वाली पहली हिमाचली रियासत बनी |

(i) अस्थायी हिमाचल सरकार - 26 जनवरी, 1948 ई. को हिमाचल प्रदेश स्टेट्स रीजनल कौंसिल की एक सभा में पहाड़ी प्रान्तों की अस्थायी सरकार बनी | इस अस्थायी सरकार का प्रधान शिवानंद रमौल को चुना गया |

(ii) हिमाचल का नामकरण - 26 से 28 जनवरी, 1948 ई. में प्रजामण्डल और रियासतों के राजाओं का सम्मेलन सोलन के दरबार में हुआ | इस सम्मेलन की अध्यक्षता बघाट के राजा दुर्गासिंह ने की | इस सम्मेलन में सभी पहाड़ी रियासतों ने "हिमाचल प्रदेश" का नामकरण किया |

(iii) सुकेत सत्याग्रह - 18 फरवरी, 1948 ई. को नेताओं और जनता ने रियासतों के भारत में विलय के लिए सत्याग्रह करने का फैंसला किया | पं. पद्म देव के नेतृत्व से घबराकर 22 फरवरी, 1948 ई. को सुकेत राजा ने सरकार से मदद मांगी | 15 अप्रैल, 1948 ई. को सुकेत हिमाचल में शामिल हो गया | 1948 ई. के प्रारम्भ तक सभी रियासतों का भारतीय संघ में विलय हो गया |

(iv) हिमाचल प्रदेश का जन्म - 15 अप्रैल, 1948 ई. को लंबी राजनैतिक लड़ाई के बाद 26 शिमला हिल स्टेट्स और 4 पंजाबी पहाड़ी रियासतों (कुल 30 रियासतों) को मिलाकर हिमाचल प्रदेश का गठन किया गया | हिमाचल प्रदेश के गठन के समय इसमें 4 जिलें चम्बा, मण्डी, महासू और सिरमौर थे | हिमाचल प्रदेश में 24 तहसीलें एवं 2 उप-तहसीलें थी | हिमाचल प्रदेश का क्षेत्रफल 27108 वर्ग किमी. था | 15 अप्रैल, 1948 को हिमाचल प्रदेश को "मुख्य आयुक्त क्षेत्र" अर्थात् चीफ कमिश्नर प्रोविन्स बनाया गया | एन. सी. मेहता प्रदेश के पहले मुख्य आयुक्त (चीफ कमिश्नर) बने | 1948 से 1951 तक हिमाचल प्रदेश मुख्य आयुक्त क्षेत्र रहा और यहाँ पर 3 मुख्य आयुक्त बने | एन. सी. मेहता, ई. पेंडरल मून तथा भगवान सहाय को हिमाचल प्रदेश के आखिरी मुख्य आयुक्त रहे |

                                                     

                            




(v) 15 अप्रैल, 1948 ई. को हिमाचल प्रदेश का प्रशासनिक ढाँचा - हिमाचल प्रदेश के गठन के समय 24 तहसीलें और 2 उप-तहसीलें थी | शिमला हिल स्टेट्स की 26 छोटी बड़ी रियासतों को मिलाकर महासू जिले का गठन किया या | मण्डी और सुकेत रियासतों को मिलाकर मण्डी जिले का गठन किया गया | चम्बा रियासत से चम्बा और सिरमौर रियासत में सिरमौर जिले का गठन हुआ |

(क) महासू जिला - महासू जिले की 26 रियासतों को मिलकर 11 तहसीलें बनाई गई |
1. अर्की (बाघल, कुनिहार, मांगल)
2. सोलन (बघाट, बेजा, कुठाड़)
3. कुसुमपटी (क्योंथल का जुन्गा, धामी, कोटी)
4. ठियोग (ठियोग, घुण्ड, रतेश, बलसन)
5. कुमारसेन (कुमारसेन)
6. रामपुर (बुशहर की रामपुर)
7. रोहणू (रोहणू बुशहर की)
8. चीनी (बुशहर की चीनी)
9. जुब्बल (जुब्बल, रावी, ढाढी)
10. सुन्नी (भज्जी)
11. चौपाल (जुब्बल की चौपाल और थरोच रियासत)

(ख) सिरमौर जिला - 4 तहसील (नाहन, पौंटा, रेणुका, पच्छाद) |

(ग) मण्डी जिला - 6 तहसील (मण्डी सदर, सुंदरनगर, चच्योट, सरकाघाट, करसोग, जोगिन्द्रनगर) |

(vi) 1950 ई. में हिमाचल प्रदेश से हस्तान्तरित और हिमाचल प्रदेश में शामिल किए गाँव -

(क) हिमाचल प्रदेश में शामिल गाँव -
1. पंजाब से -सोलन कैण्ट, कोटगढ़ कोटखाई, उत्तरप्रदेश-सनसोग, भाटर |
2. पैप्सू से - कुफरी, धार, खुलोग, गोलिया, जमराह, सुरेटा |

(ख) हिमाचल प्रदेश से हस्तान्तरित गाँव -
1. पंजाब को - संजौली, भराड़ी, चक्कर, प्रोस्पेक्ट हिल, कुसुमपटी, पट्टी रिहाना |
2. पैप्सू की - रामपुर, वाकना, कोटाह, भरी |


(vii) 'ग' श्रेणी का राज्य हिमाचल -
                                            भारतीय ससंद में 1951 ई. में श्रेणी के राज्यों का अधिनियम पारित किया | इस अधिनियम के आधार पर 1951 ई. में हिमाचल प्रदेश को श्रेणी का राज्य बनाया गया | अब मुख्यायुक्त के स्थान पर उपराज्यपाल बनाया गया | 1 मार्च, 1952 को मेजर जनरल हिम्मत सिंह को हिमाचल प्रदेश का पहला उपराज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर) बनाया गया | हिमाचल प्रदेश 1951-1956 ई. तक 'ग' श्रेणी का राज्य बना रहा | वहीं 1952 में 36 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुए | 24 सीटों के साथ कांग्रेस को बहुमत मिला | डॉ. यशवंत सिंह परमार 24 मार्च, 1952 ई. को हिमाचल प्रफ्देश के पहले मुख्यमंत्री बने | के. एल. मेहता 1952 ई. में हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्य सचिव बने | हिमाचल प्रदेश विधानसभा का प्रथम सत्र 1952 ई. में राष्ट्रपति निवास (वायस रीगल लॉज) में हुआ | जिनका उद्घाटन उपराज्यपाल मे. ज. हिम्मत सिंह ने किया | वर्ष 1952-56 के बीच विधानसभा की बैठकें राष्ट्रपति निवास (वायस रीगल लॉज) हिमाचल धाम और कौंसिल चेम्बर में हुई |

(viii) बिलासपुर पाँचवाँ जिला -
                                               1 जुलाई, 1954 ई. को ‘ग’ श्रेणी (Part ‘C’ State) के राज्य बिलासपुर का हिमाचल प्रदेश में विलय हो गया | बिलासपुर हिमाचल प्रदेश का पाँचवाँ जिला बना | हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर के विलय के बाद क्षेत्रफल 27,018 + 1168 = 28,186 वर्ग किमी. हो गया | बिलासपुर को शामिल करने के बाद विधानसभा सदस्यों की संख्या 41 हो गई |

                                                                       

                      


(ix) केन्द्रशासित प्रदेश - 
                               1956 में ’राज्य पुनर्गठन आयोग’ के सदस्य जस्टिस फाजिल अली. एच. एन. कुजरों और के. एम. पाणिकर ने दो के मुकाबले एक मत से हिमाचल प्रदेश को पंजाब में शामिल करने की सिफारिश कर दी | लेकिन डॉ. परमार के प्रयासों से हिमाचल अपना अस्तित्व बचाए रखने में कामयाब रहा | 1956 को हिमाचल प्रदेश को केद्रशासित प्रदेश बनाया गया और बजरंग बहादुर इस केन्द्रशासित प्रदेश के पहले उपराज्यपाल बने | हिमाचल प्रदेश 1956 से 1971 ई. तक केन्द्रशासित प्रदेश रहा | बहादुर सिंह 1971 ई. में हिमाचल के 5वें और आखिरी उप-राज्यपाल थे |

(x) क्षेत्रीय परिषद् - 
                                   1956 ई. में विधानसभा को भंग कर 41 सदस्यीय क्षेत्रीय परिषद् का प्रावधान किया गया | डॉ. परमार ने 31 अक्टूबर, 1956 को त्यागपत्र दे दिया | 1957 में क्षेत्रीय परिषद् के सदस्यों का निर्वाचन हुआ और कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिला | 1957 से 1963 तक हिमाचल प्रदेश में क्षेत्रीय परिषद रही | 1963 में विधानसभा की वापसी हुई और क्षेत्रीय परिषद् को भंग कर दिया गया | डॉ. यशवंत सिंह परमार 1963 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने | ठाकुर कर्म सिंह को प्रांतीय परिषद् का प्रथम अध्यक्ष चुना गया था |

(xi) किन्नौर छठा जिला -
                                1 मई, 1960 को महासू जिले से चिनी तहसील अलग कर किन्नौर नाम से हिमाचल प्रदेश का छठा जिला बनाया गया | किन्नौर जिले में निचार, कल्पा, सांगला तीन तहसीलें तथा मुरंग, पूह और हांगरांग उपतहसीलें बनाई गई |
(xii) पंजाब का पुनर्गठन और विशाल हिमाचल -
                                                            1 नवम्बर, 1966 ई. को पंजाब का पुनर्गठन किया गया जिसके बाद पंजाब से निम्न क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में शामिल किए गए -
1. जिला काँगड़ा से - काँगड़ा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और शिमला |
2. जिला अम्बाला से - नालागढ़ |
3. जिला गुरदासपुर से - डलहौजी |
4. जिला होशियारपुर से - लोहारा, अम्ब, ऊना और संतोखगढ़ |

हिमाचल प्रदेश में 6 के बाद 4 और जिले काँगड़ा, कुल्लू, शिमला और लाहौल-स्पीति 1966 में पंजाब पुनर्गठन के बाद बने | पंजाब राज्य पुनर्गठन आयोग 1965 के अध्यक्ष सरदार हुकम सिंह थे | हिमाचल प्रदेश में 1 नवम्बर, 1966 ई. को जिलों की संख्या 6 से बढ़कर 10 हो गई | हिमाचल प्रदेश का क्षेत्रफल 55,673 वर्ग किमी. हो गया | डॉ. यशवंत सिंह परमार 1967 ई. के चुनाव जीतने के बाद तीसरी बार मुख्यमंत्री बने |


(2) 1966 ई. में 4 नये जिलों का प्रशासन -

(क) जिला काँगड़ा - 6 तहसीलें (काँगड़ा, पालमपुर, नूरपुर, देहरा गोपीपुर, हमीरपुर, ऊना) |
(ख) जिला कुल्लू - 1 तहसील (कुल्लू), 3 उप-तहसील (बंजार, आनी, निरमण्ड) |
(ग) जिला शिमला - 2 तहसील (शिमला, कण्डाघाट), 1 उप-तहसील (नालागढ़) |
(घ) जिला लाहौल-स्पीति - 2 तहसील (लाहौल और स्पीति) |

                                                                     

                       



(xiii) पूर्ण राज्य की प्राप्ति - 
                                        जनवरी, 1968 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने एकमत होकर प्रस्ताव पास कर राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की | 18 दिसम्बर, 1970 ई. को भारतीय संसद ने एकमत से हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य बनाने का प्रस्ताव पारित किया | 25 जनवरी, 1971 ई. को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिमला के रिज मैदान पर हिमाचल प्रदेश को देश का 18वाँ पूर्ण राज्य बनाने की घोषणा की | 25 जनवरी, 1971 को हिमाचल प्रदेश देश का 18वाँ पूर्ण राज्य बना और डॉ. यशवंत सिंह परमार पूर्ण राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने | 25 जनवरी, 1971 को हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद एस. चक्रवर्ती हिमाचल प्रदेश के प्रथम राज्यपाल (गवर्नर) बने | पूर्ण राज्य प्राप्ति के बाद देशराज महाजन विधानसभा अध्यक्ष बने |

(xiv)
  (1) जिलों का पुनर्गठन (1972) - 
                                        पूर्ण राज्य बनते समय हिमाचल प्रदेश में 10 जिले थे | 1972 में जिलों का पुनर्गठन किया गया | काँगड़ा जिले को विभाजित कर ऊना व हमीरपुर जिलों को बनाया गया, वहीं शिमला, महासू को पुनर्गठित कर शिमला व सोलन जिलों का निर्माण किया गया | आज हिमाचल प्रदेश में 12 जिले - चम्बा, सिरमौर, मण्डी, बिलासपुर, किन्नौर, काँगड़ा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, शिमला, सोलन, ऊना व हमीरपुर हैं | 1 सितम्बर, 1972 ई. को हिमाचल प्रदेश में 35 तहसीलें और 9 उप-तहसीलें शामिल थीं |

(2) 1972 में जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था -
(क) जिला काँगड़ा - 4 तहसीलें (काँगड़ा, पालमपुर, नूरपुर और देहरा गोपीपुर) |
(ख) जिला हमीरपुर - 2 तहसीलें (हमीरपुर, बड़सर) |
(ग) जिला ऊना - 1 तहसील (ऊना), 1 उप-तहसील (अम्ब) |
(घ) जिला शिमला (महासू और शिमला जिले से) - 6 तहसीलें (शिमला, ठियोग, रामपुर, चौपाल, जुब्बल और रोहणू) |
(ड़) जिला सोलन (महासू और शिमला जिले से) - 4 तहसीलें (सोलन, अर्की, नालागढ़, कण्डाघाट) |



Himachal Pradesh general knowledge - historical dates

हिमाचल प्रदेश  सामान्य ज्ञान-ऎतिहासिक तिथियां:-

Himachal Pradesh general knowledge - historical dates
Himachal Pradesh general knowledge - historical dates









 550 ई. - चम्बा रियासत की स्थापना मारुवर्मन द्वारा |
630 ई. - बिलासपुर व हण्डूर का युद्ध |
765 ई. - वीरसेन द्वारा सुकेत राज्य की स्थापना |
900 ई. - कहलूर रियासत की स्थापना वीरचन्द चंदेल द्वारा |
920 ई. - साहिल वर्मन द्वारा चम्बा शहर की स्थापना |
1000 ई. - तोमर राजपूत झेटपाल द्वारा नूरपुर राज्य की स्थापना |
1009 ई. - महमूद गजनवी का काँगड़ा किले व ज्वालामुखी पर आक्रमण |
1100 ई. - अजय चंद द्वारा नालागढ़ रियासत की स्थापना |
1154 ई. - कुनिहार रियासत की स्थापना अभोज देव द्वारा |
1170 ई. - पूर्वचंद द्वारा जसवां राज्य की स्थापना |
1195 ई. - शुभंश प्रकाश द्वारा सिरमौर रियासत की स्थापना |
1211 ई. - गिरिसेन द्वारा क्योंथल राज्य की स्थापना |
1300 ई. - बाणसेन द्वारा मण्डी रियासत की स्थापना |
1365 ई. - फिरोजशाह तुगलक का काँगड़ा व ज्वालामुखी पर आक्रमण |
1399 ई. - तैमूर लंग द्वारा पहाड़ी रियासतों को लूटना |
1405 ई. - हरिचंद द्वारा गुलेर राज्य की स्थापना |
1450 ई. - शिवराम चंद द्वारा सिब्बा राज्य की स्थापना |
1550 ई. - दतार चंद्र द्वारा दतारपुर राज्य की स्थापना |
1550 ई. - सिबरन चंद द्वारा डाडा सिब्बा रियासत की स्थापना |



1620 ई. - जहांगीर का काँगड़ा पर अधिकार |
1686 ई. - भंगाणी साहिब की लड़ाई | गुरु गोविन्द सिंह की विजय हुई |
1667 ई. - जयचंद द्वारा ठियोग रियासत की स्थापना |
1621 ई. - कर्मप्रकाश द्वारा नाहन शहर की स्थापना |
1526 ई. - अजबर सेन द्वारा मण्डी शहर की स्थापना |
1654 ई. - दीपचंद द्वारा बिलासपुर शहर की स्थापना |
1700 ई. - हमीरचंद द्वारा हमीरपुर शहर की स्थापना |
1748 ई. - अभयचंद द्वारा सुजानपुर टिहरा शहर की स्थापना |
1712 ई. - गरुण सेन द्वारा सुंदरनगर शहर की स्थापना |
1786 ई. - नेरटी शाहपुर युद्ध |
1783 ई. - राजा संसार चंद द्वारा काँगड़ा किले पर कब्जा |
1809 ई. - संसार चंद व महाराजा रणजीत सिंह के बीच ज्वालामुखी संधि |
1815 ई. - गोरखा-अंग्रेज युद्ध, अमर सिंह थापा की हार |
1822 ई. - मेजर कैनेडी द्वारा शिमला शहर की स्थापना |
1854 ई. - लॉर्ड डलहौजी द्वारा डलहौजी शहर की स्थापना |
1857 ई. - नसीरी बटालियन के सूबेदार भीम सिंह के नेतृत्व में जतोग विद्रोह |
1823 ई. - राजा संसार चंद की मृत्यु |
1895 ई. - भटियात जनता विद्रोह (चम्बा रियासत के अत्याचारों के विरुद्ध हुआ था) |
1905 ई. - बाघल के किसानों ने विद्रोह किया |
1906 ई. - डोडरा क्वार में विद्रोह हुआ |
1909 ई. - मण्डी जनता विद्रोह (राजा व् वजीर पाधा जीवानन्द के विरुद्ध) |
1921 ई. - महात्मा गांधी का पहली बार शिमला आना |
1930 ई. - डांडरा आंदोलन (बिलासपुर के राजा के विरुद्ध) |
1938 ई. - शिमला हिल स्टेट्स हिमालयन रियासती प्रजामंडल की स्थापना हुई |
16 जुलाई, 1939 ई. - धामी गोली काण्ड |



1942 ई. - सिरमौर रियासत में पझौता आंदोलन |
8-10 मार्च, 1946 ई. - मण्डी कांफ्रेंस |
26 जनवरी, 1948 ई. - हिमाचल प्रदेश में अस्थायी सरकार की स्थापना |
26-28 जनवरी, 1948 ई. - सोलन सम्मेलन |
18 फरवरी, 1948 ई. - सुकेत सत्याग्रह |
15 अप्रैल, 1948 ई. - हिमाचल प्रदेश का जन्म |
 1951 ई. - हिमाचल प्रदेश को ‘ग’ श्रेणी का राज्य बनाया गया |
1 मार्च, 1952 ई. - हिमाचल प्रदेश के मुख्य आयुक्त के स्थान पर उपराज्यपाल की नियुक्ति |
24 मार्च, 1952 ई. - हिमाचल प्रदेश में विधानसभा व प्रथम सरकार की स्थापना |
1 जुलाई, 1954 ई. - बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में शामिल होकर पाँचवा जिला बना |
1 नवम्बर, 1956 ई. - हिमाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया |
15 अगस्त, 1957 ई. - हिमाचल प्रदेश में क्षेत्रीय परिषद की स्थापना, जिसके ठाकुर कर्मसिंह अध्यक्ष चुने गए |
 1 मई, 1960 ई. - किन्नौर हिमाचल प्रदेश का छठा जिला बना |
1 जुलाई, 1963 ई. - क्षेत्रीय परिषद को हिमाचल विधानसभा में परिवर्तित किया गया |
1 नवम्बर, 1966 ई. - पंजाब पुनर्गठन के बाद काँगड़ा, कुल्ल्लू, शिमला, लाहौल-स्पीती, नालागढ़ के क्षेत्रों को हिमाचल में मिलाया गया |



1970 ई. - हिमाचल प्रदेश में विश्वविद्यालय स्थापित |
25 जनवरी, 1971 ई. - हिमाचल प्रदेश देश का अठारहवां पूर्ण राज्य बना |
1971 ई. - हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय व् लोक सेवा आयोग का गठन |
1971 ई. - हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय व् लोक सेवा आयोग का गठन |
1 सितम्बर, 1972 ई. - जिलों का पुनर्गठन, हमीरपुर, सोलन, ऊना जिलों का निर्माण |
1978 ई. - कृषि विश्विद्यालय पालमपुर की स्थापना |
2 मई, 1981 ई. - हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार का निधन |
1985 ई. - डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यान एवं वानिकी विश्विद्यालय ‘नौणी’ की स्थापना |


Himachal Pradesh General Knowledge :- Ancient History

हिमाचल प्रदेश -प्राचीन इतिहास 


हिमाचल प्रदेश -प्राचीन इतिहास
हिमाचल प्रदेश -प्राचीन इतिहास

 




(i) प्रागैतिहासिक काल - 
                                  मारकंडा और सिरसा-सतलुज घाटी में पाए गए औजार चालीस हजार वर्ष पुराने हैं | हिमाचल प्रदेश का प्रागैतिहासिक काल में मध्य एशिया से आर्यों तथा भारत के मैदानी इलाकों से पहाड़ों पर लोगों के बसने का इतिहास प्रस्तुत करता है | भारत के मैदानों से होकर आकर बसने वाले लोगों से पूर्व कोल जिन्हें आज कोली, हाली, डोम और चनाल कहा जाता है | सभवत: हिमाचल के प्राचीनतम निवासी है |

(ii) वैदिक काल और खस - 
                                          ऋग्वेद में हिमाचल प्रदेश के प्राचीन निवासियों का दस्यु, निषाद और दशास के रूप में वर्णन मिलता है | दस्यु राजा 'शांबर' के पास यमुना से व्यास के बीच की पहाड़ियों में 99 किले थे | दस्यु राजा शांबर और आर्य राजा दिवोदास के बीच 40 वर्षों तक युद्ध हुआ | अंत में दिवोदास के उदब्रज नामक स्थान पर शांबर का वध कर दिया | मंगोलोयड जिन्हें 'भोट और किरात ' के नाम से जाना जाता है | हिमाचल में बसने वाली दूसरी प्रजाति बन गई | आर्य और खस हिमाचल में प्रवेश करने वाली तीसरी प्रजाति थी | खसों के सरदार को 'मवाना' कहा जाता था | ये लोग खुद को क्षत्रिय मानते थे | समय के साथ खस समूह 'जनपदों' में बदल गए | वैदिक काल में पहाड़ों पर आक्रमण करने वाले दूसरा आर्य राजा सहस्रार्जुन था | जमदग्नि के पुत्र परशुराम ने सहस्रार्जुन का वध कर दिया |

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(iii) महाभारत काल और चार जनपद - 
                                              महाभारत काल के समय त्रिगर्त के राजा सुशर्मा ने महाभारत में कौरवों की सहायता की थी | कश्मीर, औदुम्बर और त्रिगर्त के शासक युधिष्ठिर को कर देते थे | कुल्लू की कुल देवी राक्षसी देवी हडिम्बा का भीम से विवाह हुआ था | महाभारत में चार जनपदों का वर्णन निम्नलिखित है :-

1. औदुम्बर -
                         महाभारत के अनुसार औदुम्बर विश्वामित्र के वंशज थे जो कौशिक गौत्र से संबंधित थे | काँगड़ा, पठानकोट, ज्वालामुखी, गुरदासपुर और होशियारपुर आदि क्षेत्रों में औदुम्बर राज्य के सिक्के मिले हैं | ये लोग शिव की पूजा करते हैं | पाणिनि के 'गणपथ' में भी औदुम्बर जाति का विवरण मिलता है | अदुम्बर वृक्ष की बहुलता के कारण यह जनपद औदुम्बर कहलाया |


2. त्रिगर्त - 
                 त्रिगर्त जनपद की स्थापना 8वीं BC से 5वीं BC के बीच सुशर्म चंद्र द्वारा की गई | सुशर्म चंद्र ने महाभारत के युद्ध में कौरवों की सहायता की थी | त्रिगर्त रावी, सतलुज और ब्यास नदियों के बीच का भाग था | सुशर्म चंद्र ने काँगड़ा किला बनाया और नागरकोट को अपनी राजधानी बनाया |

3. कुल्लूत - 
               कुल्लूत राज्य व्यास नदी के ऊपर का इलाका था | इसकी प्राचीन राजधानी 'नग्गर' थी | कुल्लू घाटी में राजा विर्यास के नाम से 100 ई. का सबसे पुराना सिक्का मिलता है | इस पर 'प्राकृत' और 'खरोष्ठी' भाषा में लिखा गया है | कुल्लू रियासत की स्थापना 'प्रयाग' (इलाहाबाद) से आये 'विहंगमणि पाल' ने की थी |

4. कुलिंद - 
           महाभारत के अनुसार कुलिंद पर अर्जुन ने विजय प्राप्त की थी | कुलिंद रियासत व्यास, सतलुज और यमुना के बीच की भूमि थी जिसमें सिरमौर, शिमला, अम्बाला और सहारनपुर के क्षेत्र शामिल थे |
वर्तमान समय के 'कुनैत' या 'कनैत' का संबंध कुलिंद से माना जाता है | यमुना नदी का पौराणिक नाम 'कालिंदी' है और इसके साथ - साथ पर पड़ने वाले क्षेत्र को कुलिंद कहा गया है |
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(iv) सिकंदर का आक्रमण -
                                      सिकंदर ने 326 BC के समय भारत पर आक्रमण किया और व्यास नदी तक पहुंच गया | सिकंदर का सेनापति 'कोइनोस' था | सिकंदर ने व्यास नदी के तट पर अपने भारत अभियान की निशानी के तौर पर बाहर स्तूपों का निर्माण करवाया था | जो अब नष्ट हो चुके हैं |

(v) मौर्य काल -
                            सिकंदर के आक्रमण के पश्चात चंद्रगुप्त मौर्य ने भारत में एक विशाल राज्य की स्थापना की | कुलिंद राज्य को मौर्य काल में शिरमौर्य कहा गया क्योंकि कुलिंद राज्य मौर्य साम्राज्य के शीर्ष पर स्थित था | कालांतर में यह शिरमौर्य सिरमौर बन गया | चंद्रगुप्त मौर्य के पोते अशोक ने मझिम्म और 4 बौद्ध भिक्षुओं को हिमालय में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा |

(vi) मौर्योत्तर काल - 
                           मौर्यों के पतन के बाद शुंग वंश पहाड़ी गणराज्यों को अपने अधीन नहीं रख पाए और वे स्वतंत्र हो गए | ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी के आसपास शकों का आक्रमण शुरू हुआ | शकों के बाद कुषाणों के सबसे प्रमुख राजा कनिष्क के शासनकाल में पहाड़ी राज्यों ने समर्पण कर दिया और कनिष्क की अधीनता स्वीकार कर ली |
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(vii) गुप्तकाल - 
                  गुप्त साम्राज्य की नींव चंद्रगुप्त-प्रथम के दादा श्री गुप्त ने रखी | समुद्रगुप्त (भारत का नेपोलियन) इस वंश का सबसे प्रतापी राजा था |

(viii) हूण -
 गुप्तवंश की समाप्ति का मुख्य कारण हूणों का आक्रमण था | हूणों का प्रमुख राजा 'तोरमाण' और उसका पुत्र 'मिहिरकुल' था | गुज्जर और गद्दी स्वयं को हूणों के वंशज मानते हैं |



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